अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद

अखिल भारतीय संत
आश्रम परिषद

भारत की सनातन संत परंपरा को डिजिटल युग में संजोने का पावन संकल्प — धर्म, संस्कृति और सेवा का राष्ट्रीय मंच।

सनातन संस्कृति की
डिजिटल सेवा

अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद एक राष्ट्रीय संगठन है जो भारत की प्राचीन संत परंपरा, मठों और आश्रमों के संरक्षण हेतु समर्पित है। हमारा मुख्य कार्यालय धर्मनगरी हरिद्वार में स्थित है।

हमारा उद्देश्य देश के कोने-कोने में फैले आश्रमों को एक डिजिटल मंच प्रदान करना है ताकि श्रद्धालु आसानी से उन तक पहुँच सकें और सनातन धर्म की सेवा कर सकें।

हम न केवल संस्थाओं को एक पहचान देते हैं, बल्कि उनके आध्यात्मिक कार्यों को पूरे देश तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं।

"ऋषियों की इस पावन भूमि पर धर्म और संस्कृति का संरक्षण ही हमारा संकल्प है।"
आश्रम संत
2009
स्थापना वर्ष

उद्देश्य, दृष्टि एवं संकल्प

🎯
हमारा उद्देश्य
भारत के प्रत्येक आश्रम, मठ और मंदिर को एक सत्यापित डिजिटल पहचान देना और श्रद्धालुओं को उनसे जोड़ना। धर्म की सेवा में प्रौद्योगिकी का उपयोग करना।
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हमारी दृष्टि
एक ऐसा भारत जहाँ सनातन संस्कृति का हर केंद्र डिजिटल रूप से सशक्त हो, सुरक्षित हो और वैश्विक स्तर पर पहचाना जाए।
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हमारा संकल्प
प्रत्येक संत, महात्मा और धर्माचार्य की गरिमा की रक्षा करना तथा उनकी सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाना हमारा अटल संकल्प है।
500+
पंजीकृत संस्थाएं
28+
राज्य कवर
11,000+
श्रद्धालु सदस्य
2009
स्थापना वर्ष
100%
सत्यापित डेटा

परिषद की कार्यकारिणी

हमारे सम्माननीय पदाधिकारी जो इस अभियान का मार्गदर्शन करते हैं

अध्यक्ष
परम पूज्य अध्यक्ष जी
उपाध्यक्ष
स्वामी जी
महामंत्री
महंत जी
कोषाध्यक्ष
कोषाध्यक्ष जी

जिन मूल्यों पर हम खड़े हैं

०१
धर्म
सनातन धर्म की परंपराओं का सम्मान और उनका संरक्षण करना हमारी प्राथमिकता है। हर कार्य धर्मानुसार।
०२
सत्यनिष्ठा
हर पंजीकृत संस्था का व्यक्तिगत सत्यापन। 100% पारदर्शिता और विश्वसनीय जानकारी हमारी नींव है।
०३
सेवा
श्रद्धालुओं और संस्थाओं दोनों की निःस्वार्थ सेवा। हम माध्यम हैं, सेवा का भाव ही हमारी पूंजी है।
०४
एकता
विभिन्न मत, पंथ और सम्प्रदायों को एकसूत्र में पिरोना। भारतीय आध्यात्मिकता की विविधता में एकता।
०५
नवाचार
परंपरा और प्रौद्योगिकी का संगम। प्राचीन ज्ञान को डिजिटल माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना।
०६
राष्ट्रभक्ति
भारत की सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा। धर्म और राष्ट्र का अभिन्न संबंध हमारी प्रेरणा है।

28+ राज्यों में
हमारी उपस्थिति

हिमालय की तराई से लेकर दक्षिण के सागर तट तक, परिषद का जाल पूरे भारत में फैला है।

उत्तर प्रदेश उत्तराखंड राजस्थान मध्य प्रदेश महाराष्ट्र गुजरात बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल तमिलनाडु कर्नाटक केरल हिमाचल प्रदेश पंजाब हरियाणा दिल्ली + 12 और राज्य
उत्तर प्रदेश · 120+
उत्तराखंड · 80+
राजस्थान · 60+
मध्य प्रदेश · 45+
महाराष्ट्र · 40+
गुजरात · 35+
बिहार · 30+
पश्चिम बंगाल · 25+
तमिलनाडु · 20+
हिमाचल · 18+
पंजाब · 15+
+ 17 राज्य
यत्र विश्वम् भवत्येकनीड़म्
— जहाँ सारा विश्व एक घोंसले के समान हो जाए (ऋग्वेद)
आज ही जुड़ें

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